Friday, June 29, 2018

VERNACULAR Meaning in Hindi and English - वर्नेक्यलर का हिंदी मतलव(मीनिंग)

Vernacular Meaning in Hindi and English : आज का टॉपिक वर्नेक्यलर का हिंदी और इंग्लिश मतलव(मीनिंग) है. तो समय ना लेते हुये. Meaning of Vernacular Language in Hindi and English को पढ़ते है. हमने यहाँ बेस्ट जानकारी शेयर की है, एक बार जरुर पूरी पोस्ट पढ़े. 

Vernacular Meaning in Hindi and English :


मीनिंग ऑफ़ वर्नेक्यलर इन हिंदी - 

Noun                                          Adjective 
 - मातृभाषा.                                   - जन्मदेशी.
 - देशी भाषा.                                  - जातीय.
 - मातृ भाषा.                                 - राष्ट्रीय.
 - प्राकृत भाषा.                               - स्वदेशी.
 - विशिष्ट शब्दावली.                         - क़ौमी.


मीनिंग ऑफ़ वर्नेक्यलर इन इंग्लिश -

Adjective
1. Being or characteristic of or appropriate to everyday language.
Examples
- A vernacular term.
- Vernacular speakers.
- The technical and vulgar names for an animal species.

Noun
1. The everyday speech of the people (as distinguished from literary language).
2. A characteristic language of a particular group (as among thieves).

फ्रेंड अपने अब तक वर्नेक्यलर का हिंदी और इंग्लिश मतलव(मीनिंग) संक्षेप में जान लिया लेकिन अभी भी इसका एक बेहतरीन पार्ट बाकी है जिसे हमने नीचे पूरी पोस्ट के जरिये आपके लिए लिखा है. जिसमे सभी मतलबो पर विस्तार से बात करते हुए उनके प्रयोग और प्रभावों को थोड़ा ज्यादा डिटेल्स में पेश किया गया ताकि आप इन्हें पढ़कर और ज्यादा अच्छे से चीजो को समझकर अपने दिमाग में डाल सके तो अब आगे बड़ते है.

Vernacular Meaning in Hindi and English

What is the Meaning of Vernacular Language in Hindi and English :


इनके मीनिंग का वर्णन -

- देशी भाषा, इस शब्द को हम लोकल भाषा से भी समझ सकते है याने वो भाषा जिसे किसी निश्चित क्षेत्र में ही बोला और समझा जा सकता है. इस तरह की भाषाओ को केबल उस जगह के लोग ही अच्छे से समझ पाते है, अधिकतर देशो के अपने - अपने क्षेत्र में अलग - अलग बोलिया बोली जाती है. ये कोई मान्यता प्राप्त भाषाए नही बल्कि किसी पर्टिकुलर एरिया की तरफ इशारा करती है.

उदाहरण के तौर पर भारत में विभिन्न बोलियाँ बोली जाती है इसलिए भारत को बोलियों का गढ़ भी मानने का एक कारण है क्योकि विश्व में यहाँ ही सबसे अधिक प्रकार की बोलिया है. यहाँ सभी क्षेत्रो की अपनी ही एक लोकल बोली होती है जिसका प्रयोग यहाँ रहने बाले अपने बचपन से करते है आ रहे है कही ना कही इनकी शुरुआत लोगो ने ही की है.

- प्राकृत भाषा, के अंतर्गत हम संस्कृत को मानते है ऐसा माना जाता है कि पूरी पृथ्वी पर सबसे पहले संस्कृत भाषा आई उसके बाद इंसानों ने अलग - अलग देश और क्षेत्रो के हिसाब से अपनी सुविधा के अनुसार काफी सारी बोलियों को बना लिया है. ऐसा भी कहते सुना है कि संस्कृत से ही सभी लैंग्वेज का विकास हुआ है या कहे यही सभी की जनक है. 

संस्कृत का विकास हजारो सालो पहले ही हो चूका था और पहले बड़े - बड़े ग्रन्थ इसी की मदद से लिखे गये जो आज प्रत्येक लैंग्वेज में परिवर्तित कर उपलब्ध है. माना जाता रहा है कि यह देवताओ की बोल चाल की भाषा है जो उनके द्वारा उपयोग में लायी जाती थी. अब इसका यूज़ ना के बराबर या केवल कुछ स्कूलो में कुछ क्लास तक ही सिमित रह गयी है.

- मातृभाषा, इसे हम ऐसा भी समझ सकते है कि प्रत्येक देश की अपनी एक लैंग्वेज होती है जिसे सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त होती है और उसे देश में रहने बाले सभी लोगो को मानना ही पड़ता है उदाहरण के तौर पर भारत में हिंदी, अमेरिका में इंग्लिश, जापान में जेपेनिस, स्पेन में स्पेनिस, चायना में चायनिस भाषाये मान्यता प्राप्त है. 

हिंदी भाषा का विकास संस्कृत से ही हुआ है इसे मान्यता प्राप्त होने के बाबजूद भी देश के बहुत से ऐसे इलाके या क्षेत्र जहाँ इसको जानते तक नही बोलने पढ़ने की बात ही दूर है.

इनके प्रभाव -

- देशी भाषा, भारत की बात करे तो यहाँ बहुत सी बोलियाँ अलग - अलग क्षेत्रो में देखने को मिलती है. इनका फायदा ये है कि ये अपने - अपने क्षेत्र में बहुत प्रभावी तथा किसी भी चीज के प्रचार या लोगो तक पहुचं को इन्ही लोकल बोलियों के जरिये बनाकर ज्यादा प्रभावी परिणाम निकाले जा सकते है.

लेकिन इनका नुकसान यह है कि किसी बात, चीजो या बिज़नेस को पुरे देश में सभी लोगो तक पहुचाने के लिए उनकी लोकल लैंग्वेज के साथ वहां के कल्चर को समझने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. इन सबका कारण यहाँ भिन्नता का होना ही है.

- प्राकृत भाषा, इसमें संस्कृत को लेते है चूकी इसका सबसे पहले और प्राकृतिक तरीके से विकास के चलते इसे प्राकृत भाषा कहते है. अब इसके इफ़ेक्ट की बात करे तो इसे देवो की भाषा का दर्जा देकर पवित्र माना गया साथ ही इसे आध्यात्म से रिलेट करके भी जाना जाता है. 

अब इसका यूज़ बहुत कम हो चूका है याने लेवल आध्यात्म से जुड़े लोग या बड़े पंडितो, महात्माओ के द्वारा ही उपयोग में लायी जाती है लेकिन आज भी भारतीय संस्कृति में पूजा - पाठ, विधि - विधान आदि में इसे काफी ऊपर रखा गया है. क्योकि यह आध्यात्म की द्रष्टि से बहुत इफेक्टिव मानी जाती है. 

यहाँ तक की जितने भी मंत्र है वे इसी से बने है इसका इफ़ेक्ट हमेशा से अच्छा ही माना जाता रहा रहा है. हमारे समाज, देश और परिवार की संस्कृति के चलते. इसका अनेक भाषाओ में अपनी सुविधा के अनुसार रूपांतरण करने का एक बड़ा कारण बोलने, पढ़ने और सुनने में काफी मुश्किल प्रतीत होना ही है लेकिन आज भी कही ना कही हमारे बीच बनी है और आगे भी बनी रहेगी.

- मातृभाषा, बहुत से देशो की अपनी - अपनी लैंग्वेज है मतलव वे वहां की मदरटंग कही जायेगी क्योकि इनको बहां मान्यता प्राप्त है चूकी अब इंडिया को ले तो यहाँ हिंदी को मातृभाषा के रूप में मान्यता दी गयी लेकिन फिर भी बहुत सी जगहों पर भिन्नता आज भी है. 

इन सब के बाबजूद भी काफी हद तक हिंदी को समझा जा सकता है. इसका कोई खास नकारात्मक या सकारात्मक इफ़ेक्ट देखने को नही मिलता लेकिन सब जगह पर एक जैसी लैंग्वेज ना होने की वजह से कुछ परेशानी तो होती है.

इनका यूज़ -

- देशी भाषा, इसका तात्पर्य लोकल बोलियों से है और इनको दर्शाने के लिए इस शब्द को उपयोग में लाया जाता है.

- प्राकृत भाषा, इसके अंतर्गत संस्कृत लैंग्वेज को व्यक्त करने के लिए इस मतलव को यूज़ में लिया जाता है. इसे आध्यात्मिक तरीको से समझ कर खासकर उपयोग किया जाता है.

- मातृभाषा, सभी देश अपनी अलग - अलग भाषाओ को व्यक्त करना होता है तव इस शब्द का स्पेशल यूज़ किया जाता है.

दोस्तों मुझे उम्मीद है आपको Vernacular Meaning in Hindi and English यह पोस्ट वर्नेक्यलर का हिंदी और इंग्लिश मतलव(मीनिंग) पढ़कर बहुत कुछ भाषाओ के बारे में जानने को मिला होगा. साथ ही आपके मन में उठ रहे प्रश्नों Meaning of Vernacular Language in Hindi, What is the Meaning of "Vernacular" Language in Hindi and English का जबाव भी आसानी से मिल ही गया होगा. हमे फॉलो कर सकते है साथ ही और भी वर्ड के मतलव ऊपर सर्च बॉक्स से जान पायेंगे. 

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